पलक से फलक तक जो दूरियां हैं
तय करना है .. मगर.....
मजबूरियां हैं............................
ऐ खुदा..............
इन पंखुडियों मैं ताकत ना सही
भरदे इन आंखों मैं ख्वाबों का एक और काफिला
उड़ चलूँ इन वादियों. इन आशमान के परे
और चल ने दे यूँ मुश्किलों में
उम्मीदों का सिलसिलाः
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